मां की सीख
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आज के दिन का मां को वर्षों से इन्तज़ार था।आज वो दिन नजदीक आ गया। मेरी शादी का दिन मां ने मुझे अपने पास बुलाया और कहा सुन मेरी लाडली बेटी नीलु अभी तक तु हमारी बेटी थी। मगर अब किसी और के घर की बहु बनने जा रही है,बहु की बहुत सारी जिम्मेदारीयां होती है जो निभानी पड़ती है। अभी तुम नये घर में जाओगी सभी को तुम से बहुत उम्मीदें होंगी उन उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए तुम्हें बहुत कुछ सहना और करना पड़ेगा बेटी इस लिए तु मेरी एक बात मानना की। कभी किसी का दिल मत दुखाना और ना अपनों का जबाव देना जब तुम सबको अपना मानोगी तभी सारी मुश्किल दूर हो जाएगी क्योंकि सारी मुश्किलों का हल परिवार में बनी एकता से मिल सकता है। इसलिए तुम सबको अपना बनाकर रखना। सभी को एक डोर मे बांधकर रखना। नीलु चुपचाप सुन रही , मीरा,नीलु को समझाते -समझाते उसकी आंखे भर आई नीलु मां को पकड़ कर गले लगा कर रोने ले। धीरे-धीरे समय बीत रहा था अगली सुबह नीलु की शादी के समारोह चल रहे थे ,शादी के सारे कार्यक्रम अच्छे से सम्पन्न हुआ, नीलु विदाई के बाद अपने ससुराल आ गई । सभी घर वालों ने उसका स्वागत बहुत प्यार से किया । मगर नीलु को एक डर सा लग रहा था।जो हर लड़की को लगता है।नये घर नये लोगों के बीच में आकर ।वह सहमी -सहमी सी अपनों को खोज रही थी। तबतक उसकी सासु मां आ गई।वह उठकर खड़ी हो गई । उन्होंने कहा कि बेटी
तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारी सास नहीं हुं। मैं मां हूं।नीलु को अच्छा लगा
धीरे-धीरे नीलु उनके सारे तौर तरीकों को अपनाकर उनकी चहेती बन गई वह पढ़ी-लिखी तो थी ही, सभी छोटे, बड़े सभी का ख्याल रखना सभी घर वालों के दुःख सुख में साथ देती। कैसे समय बीत गया पता ही नहीं चला। एक दिन नीलु के सासु मां कि बहुत तबीयत खराब हो गई। सभी घर वाले कही गये थे।तब नीरु ने अपने पति राकेश से कहा कि मां की तबीयत खराब है आप आ जाओ। राकेश ने कहा कि मेरे आने में वक्त लगेगा तुम मां को ले कर हास्पिटल पहुंच जाओ मैं आ रहा हूं।नीलु अपने सासु मां को लेकर पहुंचकर इलाज करवाने लगी। तभी सभी लोग हास्पिटल पहुंच गए सभी लोग हास्पिटल के दरवाजे पर खड़े हो कर डाक्टर के बाहर आने का इंतजार कर रहे थे। तभी डाक्टर बाहर आते हैं और सभी लोग हाल पुछने लगते हैं।तब डाक्टर बोलते हैं कि आज अगर नीलु नहीं होती तो इनका बचना मुश्किल था। सभी लोग नीलु का शुक्रिया अदा करने लगते हैं। धीरे-धीरे वह सबको अपना बनालेती है। तभी नीलु के माता-पिता आ जाते हैं । और सारे घर वाले नीलु की तारीफ करते नहीं थकरहे थे। तभी वहां नीरु की
, सासु मां ने कहा कि आप लोग धन्य है जो ऐसी बेटी ईश्वर ने आप को दी। मैं ईश्वर से प्रार्थना करुंगी की अगले जन्म में नीलु जैसी
बेटी दें।
नीलु को मां की सीख याद आई।
अर्चना पांडेय,, आर्ची
गोरखपुर
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