तरसती आंखों को इक झलक दिखा दिजिए

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तरसती आंखों को इक 
झलक दिखा दिजिए
मचलते अरमां को 
सम्भलना सिखा दिजिए

पास रह कर भी ऐसा 
लगता है फासले है 
जन्मों के जन्मों के इस 
फासले को गिरा दिजिए 

खंजर सी चुभने लगी है
खामोशी आपकी मुश्कूराइए
जरा अपने लबों को हिला दिजिए

घुटन सी होने लगी है
जिंदगी से मुझे 
बिन तेरे मेरे पिया 
प्यार की बरखा
बनकर आइए मूझपे 
बरसा दिजिए

मुरझा सा गया है 
जिंदगी का चमन मेरा 
बहार बनकर आइये
एक गुल खिला दिजिए

अफ्फान हाजिपुरी ✍️
सर्वाधिकार सुरक्षित

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