बेटी है तू..
छोड़ न पीहर की परेशानी!!
तुझे क्या मतलब है,
कहाँ, कुछ भी हो रहा!!
अब तो तू चिन्ता कर,
तेरे शौहर की!!
उसके घर की,
ओर उसके बच्चों की!!
यह घर अब नहीं है तेरा,
ना ही इसपर हक है तेरा!!
पराई अमानत है अब तो तू,
अब ससुराल ही है घर तेरा!!
मत सोच की माँ तेरी बीमार है,
बस ख्याल सास का रख लो तुम!!
मत सोच कि बाप तेरा लाचार है,
बस मान ससुर का रख लो तुम!!
अब मान भी ले,
यह घर नहीं था तेरा!!
यह घर था तो तेरे लिए बस,
चिड़िया रैन बसेरा!!
बाबुल का घर चहकाया तुमने,
दिया असीमित प्यार!!
अंधियारा था जीवन में,
तुमने किया परम उजास!!
अब चली जा अपने घर को वापस,
बिटिया तु मेरी जान है!
करती रहना याद हमें,
तेरी मुस्कान ही मेरा जहान है!!
रंजना सोनी
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