तुम्हारा साथ
वही सुबह की रश्मि है
सुरमई है शाम वही।।
हूँ मैं तेरी राधा जैसी।
हो मेरे घनश्याम तुम्हीं।।
जनम जनम पुजुँ मैं तुमको।।
प्रेम मिलन आसान नहीं।।
मैंने बस तुमको पूजा है।
हो मेरे भगवान तुम्हीं।।
हूँ मैं तेरी राधा जैसी।
हो मेरे घनश्याम तुम्हीं।।
सच्चा प्रेम न पुरा होता।।
अक्षर ढाई अधूरा होता।।
बस अवनी, अम्बर के जैसे।
करूँ प्रतिक्षा मैंतेरी।।
हूँ मैं तेरी राधा जैसी।
हो मेरे घनश्याम तुम्हीं।।
जिस भी जनम मिलन होअपना।
साथ तुम्हारा हो संगी।।
प्रेम हमारा अमर हो जाए।
श्वेता की अरदास यही।।
हूँ मैं तेरी राधा जैसी।।
हो मेरे घनश्याम तुम्हीं।।
श्वेता कर्ण..!!
Comments
Post a Comment