नन्हा बचपन


एक सुनहरी चिडियाँ है ये बचपन,
मत बांधो इसे किसी डोर से,उड़ने दो,
रिश्तों मे मिठास लाता है ये बचपन,
माँ की ममता का सैलाब है ये बचपन,
पिता की मंजिल का आगाज है ये बचपन,

अपनी ही धुन मे रहता हैं ये बचपन,
हवा के साथ उड़ता है ये बचपन,
अपनेपन की पहचान होता हैं ये बचपन,
सभी चिंताओ से मुक्त होता हैं ये बचपन,
निस्वार्थ प्रेम सिखाता है ये बचपन,

बदमाशीयो,मस्तीयो का खजाना है ये बचपन,
कुटाई के बाद भी वही काम करता है बचपन,
बड़ा ही नटकट और प्यारा है ये बचपन,
सच- मुच बहुत ही नन्हा है ये बचपन ।

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