ईश्वरचंद्र विद्यासागर
ईश्वरचंद्र विद्यासागर का जन्म बंगाल में हुआ था ,वो बहुत बड़े समाज सुधारक ,लेखक,दशनिक,शिक्षाविद और उद्यमी थे।
दयालुता , नम्र,और अहंकार रहित जैसे सद्गुण उनके आभूषण थे।
एक बार उन्होंने एक नौजवान युवक को भीख मांगते देखा।
वह युवक उनके पास भी आया और उनसे 1 पैसे मांगने लगा।
ईश्वरचंद्र ने उससे पूछा अगर तुम्हें ज्यादा पैसे दिए जाएं तो तुम क्या करोगे?
युवक सकपकाया _उसने कहा ,अगर मुझे ज्यादा पैसे मिलेंगे तो मैं कुछ सामान खरीदूंगा और उसे गली मुहल्ले में बेचूंगा,और मुनाफा कमाने की कोशिश करूंगा।
ईश्वरचंद ने उसे 1 पैसे के बदले 1रुपए दिए और आगे बढ़ गए।
कई महीनों बाद वो एक बार कोलकता की सड़क से गुजर रहे थे ,तभी एक संभ्रांत नवयुवक जिसने उनके पैरों पर गिर गया।
उन्होंने उसे उठाया ,और पूछा कौन हो तुम भाई?
जी मैं वही युवक हूं ,जिसे आपने 1रुपए दिए थे।
आज मैं शहर का बड़ा व्यापारी हो गया है ,ये सब आपके सहयोग के बिना असंभव था।
ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने कहा _ये सब तुम्हारी मेहनत का नतीजा है ,उस पैसे को तुमने सही ढंग से सही जगह प्रयोग किया,वही अगर उसे बुरे कार्य,रसना के लिए प्रयोग करते तो वो क्षणिक सुख देता,बड़ा आदमी न बनाता।
समाप्त
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