ऐ खूबसूरत शख्स तू कुछ बात कर तू बात कर कुछ और साबित कर कि तू खुश हैं। ऐ खूबसूरत शख्स तू अपनी खामोशी को तोड़कर, अपने मन की गिरहों को खोल और साबित कर कि तू टूटा हुआ नही हैं। ऐ खूबसूरत शख्स तू कुछ बोल, कुछ कह तोड़ सारी आशंकाओं को बता दें सारी दुनिया को कि तू हारा हुआ नही हैं। ऐ खूबसूरत शख्स तू....... गरिमा राकेश 'गर्विता' कोटा राजस्थान
बेटा हिन्द का हूँ मैं, मेरी पहचान है हिंदी माँ सरस्वती कि वीणा की झंकार है हिन्दी, बेटा हिन्द का हूँ मैं मेरी पहचान है हिंदी।। लहू में बहती सांसों की सोहं धड़कन प्राण है हिंदी बेटा हिन्द का हूँ मैं मेरी पहचान है हिंदी।। अविनि के कण कण से प्रवाहित निशा सांध्य दिवस शुभ प्रभात है हिंदी।। ह्रदय मेरा एक मंदिर है माँ भारती देवी स्वर साधना आराधना मेरी है हिंदी बेटा हिन्द का हूँ मैं मेरी पहचान है हिंदी।। पूरब से पश्चिम ,उत्तर से दक्षिण जन आकांक्षा आत्म पुकार है हिंदी।। हिमालय से ऊंचा सागर से गहरी हिन्द की भाग्य है हिंदी बेटा हिन्द का हूँ मै मेरी पहचान है हिंदी।। प्रेम की भाषा मानवता रसधार है हिंदी अविरल निर्मल निर्झर कल कल कलरव गान है हिंदी। मैं बेटा हिन्द का हूँ मेरी पहचान है हिंदी।। संस्कृति सम्यक संस्कार है हिंदी हिन्द एक नेक की बंधन सूत्र राष्ट्र का सार है हिंदी। बेटा हिन्द का हूँ मैं मेरी पहचान है हिंदी।। नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।
मीरा मैं भी तेरी तरह कान्हा को पाना चाहती हूँ। पर राकेश जी से करती हूँ प्रेम बहुत मैं, दोनों बच्चों पर जान छिड़कती हूँ। मीरा मैं भी तेरी तरह गिरधर के लिए जोगन बनना चाहती हूँ। पर भाइयों के नेह डोर से बँधी मैं, माँ-पिता पर अपनी जान वारती हूँ। मीरा मैं भी तेरी तरह माधव की चाकर बनना चाहती हूँ। पर उपाध्याय सर की दी राह भूल नहीं पाती मैं, मंजु मौसी के नेह व आशी के बिना तो चल भी नहीं पाती हूँ। मीरा मैं भी तेरी तरह गोविंद के दरस चाहती हूँ। पाने को अपने सांवरियां को वन-वन भटकना चाहती हूँ। पर पीहर, ससुराल की मर्यादा मैं, भटक नही पाती हूँ। मीरा मैं भी तेरी तरह मोहन को.......। गरिमा राकेश 'गर्विता' कोटा राजस्थान
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