तुम मिले तो एक वजह मिली

तुम मिले तो एक वजह मिली
जीवन तो थी पर अनुभूति तो
तुमने सौगात में दी
जीवन तो तब भी था और
अब भी है फिर झूठ क्यों कहूं
पर तुम्हारे आने से एक आश सी जगी
एक बंधन सा मन तुमसे बंधना चाहा
तुम मिल कर भी न मिले
फिर भी हृदय तुम्हें खोने से क्यों डरता रहा
हम तो जैसे थे वैसे
आज भी हैं
न सांसें बदली,न भावनाएं
मानों तो आज भी बहाव बंद नहीं
बदल तो तुम गए
मानों तुम्हारी धारा ने तो अपनी
दिशा ही परिवर्तीत कर दिया
हम जो थे पुरे सही थे
पर तुम्हारी अनुभूति ने मुझे
जैसे मुझे प्रेम डोर में बांध लिया
एक खुबसूरत अहसास से एक रचनाकार बना दिया
सही गलत की तो गुंजाइश थी ही नहीं
फिर मन से ओझलता को क्यों दर्शा दिया
                
                                                       प्रिया

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