वो पानी नहीं है

दिल में उठा तूफान मिटाने की खातिर
नाच रहे हैं मोर 
सांझ ढल रही इंद्रधनुषी चुनरिया ओढे
कोयल पपीहे कूक रहे कोकिल स्वर में
भंवरे भी गुंजार रहे फूलों के भंवर में
लहलहा रहा धरती का आंचल
आसमां भी मुस्कुरा रहा
मिलन की इस पावन सावन की वेला में
सज संवर कर लबों से अमृत बरसाते हुए
निकली जब चंचल शोख हसीना आंचल से दुपट्टा सरकाते हुए
छन छन छन छन पायल की झंकार लूटाते हुए
कब्र में सोये मूर्दो को जगाते हुए
देखकर महबूब को प्यार की गलियों में
सागर भी मचल उठा
महबूब की खूबसूरत अदाओं से हुआ घायल
एक पल भी ना ठहर सका
दिलजला धुंआ धुंआ हो बादल बन आसमां में उड़ चला
गरज रहा  बरस रहा  सागर बनकर बादल 
जमाने ने समझा जिसे बारीश का बहता पानी  
वो पानी नहीं है दोस्तों
वो दिलजले सागर के प्यार की निशानी है दोस्तों
प्यार में बहते अश्कों की कहानी है दोस्तों
बूंद बूंद बहती सागर की जवानी है दोस्तों
दिलजले आशिक की लहरों की रवानी है दोस्तों।।


पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐

Comments

Popular posts from this blog

आज की मांग

आखिरी अदालत

सुनहरी यादें