--- नही मालूम था ---


कोई ऐसा भी मिल जाएगा,नही मालूम था!
जो पाया था वो तो कब का खो चुके थे 
क्या खोया और क्यों खोया ये सोचकर 
उलझे हुए थे इस कदर एक अरसे से
कोई यूं सुलझा जाएगा,नही मालूम था!
कभी होते थे हम भी जिंदादिल मगर 
लड़े हैं हालातों से बरसों तक कुछ ऐसे 
कि जो मुस्कुराना तक गए थे भूल हम 
कोई इतना हँसा जाएगा,नही मालूम था!
बरसों से सूनी पड़ी थी आँखें जो मेरी
उनमे भी कैसे कुछ नजर आया उनको 
पतझड़ में भी हरियाली कैसे देंखे हम 
कोई ये भी सिखा जाएगा,नही मालूम था!
कोई ऐसा भी मिल जाएगा,नही मालूम था!!

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