प्राणायाम
आंखें मूंद सुखासन में बैठें
आओ कपालभाति हम सीखें
नाक से सांस लो गहरी लेकिन
तनिक धीरे आराम से,
फिर छोड़ो सांस को तुम
बलपूर्वक दमदार से।
सर्दी और जुखाम को ये,
जल्दी दूर भगायेगा,
कफ भी बिलकुल दूर हुआ,
तुमको एहसास कराएगा।
अब है अनुलोम-विलोम की बारी
करनी है थोड़ी तैयारी,
बाएं हाथ की ज्ञान-मुद्रा हो
दायां हो दाएं नथुने पर भारी
बाएं नाक से श्वास भरो तुम
दाएं नाक से छोड़ दो,
अब दाएं नाक से श्वास भरो
फिर बाएं नाक से छोड़ दो ।
सरल है प्राणायाम सभी
क्यों किंचित आभास नहीं!
प्राणवायु को शुद्ध ये रखता
करते क्यों प्रयास नहीं?
भ्रामरी प्राणायाम में
दोनों हाथ का उपयोग हो,
भ्रमर के गुंजन से,
दूर तनाव और क्रोध हो ।
अंगुष्ठ रखे हम कानों पर
और उंगलियां आँख पर हो,
गहरी सी हम सांस लेकर
छोड़े तब ॐ उच्चार हो।
प्राणायाम से स्वच्छ रहे
अपने अन्तर की काया,
श्वास को ये प्रबल बनाता
समझ में हम सबको आया।
नित्य उठ ध्यान लगाकर
करेंगे हम सब प्राणायाम,
दिनचर्या का हिस्सा बनाकर
अपनाए हम प्राणायाम।
रंजना सोनी
चूरू,राजस्थान
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