सारी उम्र गुजारी हमने



'सारी उम्र गुजारी हमने' 
कुछ अपनों को मनाने में!
('कुछ उम्र गुजारी हमने'
सब गैरों को भुलाने में)-२

(हालातों से होकर बेबस,
कुछ टूटे हुऐ मकानों में)-२
'सारी उम्र गुजारी हमने' 
अपना महल बनाने में|

'सारी उम्र गुजारी हमने' 
कुछ अपनों को मनाने में...

(बस्ते के बोझ से लेकर, 
कॉलेज की सीरीज़ों में)-२
'सारी उम्र गुजारी हमने' 
अपना ज्ञान बढ़ाने में|

'सारी उम्र गुजारी हमने'
कुछ अपनों को मनाने में...

(मोहल्ले की गलियों से लेकर,
मंदिर, तीज के मेलों में)-२
'सारी उम्र गुजारी हमने' 
सच्चा आशिक बनाने में|

'सारी उम्र गुजारी हमने'
कुछ अपनों को मनाने में...

(माता के खिलाने से लेकर, 
खुद हाथों से खाने में)-२
'सारी उम्र गुजारी हमने' 
अब बच्चों को खिलाने में|

'सारी उम्र गुजारी हमने' 
कुछ अपनों को मनाने में...

(उड़ते हुए सपनों को लेकर, 
फिर हाथों से दफनाने में)-२
'सारी उम्र गुजारी हमने' 
फिर सपने सजाने में|

'सारी उम्र गुजारी हमने' 
कुछ अपनों को मनाने में...

(बाबुल के अँगना से लेकर, 
पति के आशियाने में)-२
'सारी उम्र गुजारी हमने' 
अपनी पहचान बनाने में|

'सारी उम्र गुजारी हमने'
कुछ अपनों को मनाने में!
('कुछ उम्र गुजारी हमने'
सब गैरों को भुलाने में)-२
*रंजना सोनी*
 सुजानगढ़,चूरू,राजस्थान|
( स्वरचित एवं मौलिक)

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