शायरी और जिंदगी

शायरी और जिंदगी दोनों एक ही होती है ना ,
मुझे लगता है दोनों सहेलियां सी होती है ना।

 जिंदगी रोज सबक सिखाती है ,
शायरी उन्हें अल्फाज दिए जाती है ।

जिंदगी रोज नए रंग दिखाती है ,
शायरी रंगों में डुबोती जाती है।

 जिंदगी बेवफा है बेवफाई निभाती है,
 शायरी बेवफाई को भुलाती जाती है।

 जिंदगी का अगला छोर मौत है ,
शायरी मौत को गले लगाने से बचाती है।

 बस लिखते रहो चंद अल्फाज जिंदगी भर ,'सीमा'
 शायरी तो यूं ही खुद ब खुद बन जाती है।

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