अब हंसाएगा कौन?


हर  शय  पे  बुरी  नज़र  है  मूरख तेरी
जाग, बंदे तुझे  हर पल जगाएगा कौन?

कहां,चले  गए आप हमसे यूं रूठकर
नखरे  हमको  अब  दिखाएगा  कौन?

तुझसे जुदा हूं, अफ़सोस नहीं मुझको
यही फ़िक्र है,तुझे अब हंसाएगा कौन?

भूपेन्द्र चौहान “राज़” 

Comments

Popular posts from this blog

आखिरी अदालत

आज की मांग

आवारा बादल (भाग 30) प्रयास