संयम और धैर्य

            

भले न घर में हो कहीं, भरा हुआ कुछ कोष।
लेकिन घर में राखिए, कायम धन संतोष।।

घर में सबको मिल रहा, सुख आधार अनूप।
देवी बन रक्षा करे, घर की मां वह रूप।।

घर अपना लगता महल, यह दुनिया की रीत।
संस्कार करते इसे, पावन और पुनीत।।

घर में दीजिए, आप सभी पर ध्यान।
घर में जितने लोग हैं, सबका सम हो मान।।



श्वेता कर्ण

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