मुठ्ठी भर प्रकाश


खुद सोचो की जीवन से क्या चाहिये,
सुकूँ का आज या चमकता कल चाहिये,
फैसला ये उतना भी मुश्किल नहीं है
बस मुट्ठी भर आशा का प्रकाश चाहिये...।

सीखने को उदाहरण बहुत हैं,
लड़ने को यहाँ रण बहुत हैं,
देखो, तुममें कितनी ललक है,
उस ललक को थोड़ी सी आग चाहिये
फैसला ये उतना भी मुश्किल नहीं है
बस मुट्ठी भर आशा का प्रकाश चाहिये...।

गिरकर उठोगे तो नायाब बनोगे,
कमरबंद विचारों का तब कसोगे,
सोच लोगे तो जरूर सफल होगे,
राह मंजिल की बस होनी साफ चाहिए
फैसला ये उतना भी मुश्किल नहीं है
बस मुट्ठी भर आशा का प्रकाश चाहिये...।

तसल्ली मन में हो,कर्मों में नहीं,
धैर्य सोच में हो,कोशिश में नहीं,
प्रयास वास्तविक हो,आभासी नहीं,
सोने न दे जो बस ऐसा ख्वाब चाहिए
फैसला ये उतना भी मुश्किल नहीं है
बस मुट्ठी भर आशा का प्रकाश चाहिये...।

ठान लोगे तो चमक जाओगे,
बात मान लोगे तो उभर जाओगे,
मेहनत स्वीकार लोगे तो बन जाओगे,
नसीब पर नहीं,कर्म पर विश्वास चाहिए
फैसला ये उतना भी मुश्किल नहीं है
बस मुट्ठी भर आशा का प्रकाश चाहिये...।

स्वरचित व मौलिक✍
सुमित सिंह पवार "पवार"
उत्तर प्रदेश पुलिस
आगरा

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