सवेरा आएगा



फिर भला अंधेरा, कब तलक टिक पाएगा,

कल  फिर  दिन  निकलेगा, सवेरा आएगा,
फिर भला अंधेरा, कब तलक टिक पाएगा,

कल  फिर दिन  निकलेगा, सवेरा  आएगा,
जीवन में उजियारा आएगा, सूरज लाएगा

बन जाए तुम्हारा जीवन, अमावस की रात,
हों जाएं कितने विपरीत,ऐसे तुम्हारे हालात

दर्द, आंखों से कहीं, छलकने  ना देना तुम
छिपाकर रखना दिल में,अपने हर जज्बात

चलना होगा सदा तुम्हें,अपने वक़्त के साथ
ढलना होगा,खुद को,समझनी होगी हर बात

हल  करना पड़ेगा तुम्हें, जीवन का समीकरण
सीखना पड़ेगा तुम्हें,हरेक रिश्तों का व्याकरण

बार  बार आएंगी तुम्हें जीवन में मुश्किलात
सुलझाना मसले,काबू में करने पड़ेंगे हालात
  
कल  फिर  दिन  निकलेगा  सवेरा आएगा,
फिर भला अंधेरा, कब तलक टिक पाएगा, 


भूपेन्द्र चौहान “राज”
 

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