बावरी सी वो

है बावरी सी वो,
थोड़ी सी साँवरी सी वो,
मेरे लिये तो वो कहानी है
मगर है खुद शायरी सी वो,
है खुद में ही खुश बहुत
हंसी की है छाँव सी वो,
मुकम्मल जहाँ है उसका
नहीं है मोहताज सी वो,
आधुनिक नारी और पूर्णता की
है सटीक परिभाषा सी वो,
मुश्किलों का सामना करती
है तूफानों में कश्ती सी वो,
हार ना मान ने देती कभी
है सोच सकारात्मक सी वो,
इस तेज धूप के शहर में,
है गाँव की छाँव सी वो,
आसमानों में उड़ानें उसकी
है जमीं से जुड़े पाँव सी वो,
अपनत्व से ओत-प्रोत हृदय
है रिश्ते निभाती डोर सी वो,
दिक्कतों के घोर अंधेरों में
है उम्मीद की भोर सी वो,
व्यवहार में सामान्य है
है विचारों में गहरी सी वो,
मेरे लिये तो वो कहानी है
मगर है खुद शायरी सी वो....।

स्वरचित व मौलिक✍
सुमित सिंह पवार "पवार"
उत्तर प्रदेश पुलिस
आगरा

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